तकरीबन दो साल पहले पदोन्नत होकर डीजी बनने वाली शोभा अहोतकर का नाम बिहार के अगले डीजीपी की रेस में सबसे आगे बताया जा रहा है। शोभा अहोतकर के बारे में कहा जाता है किबिहार कैडर की भारतीय पुलिस सेवा 1990 बैच की यह सीनियर अधिकारी जन्म से मराठी, शिक्षा से हैदराबादी और मन से बिहारी हैं। 22 साल की उम्र में प्च्ै बनीं, फील्ड में इनकी सबसे पहली पोस्टिंग पटना सिटी में बतौर एएसपी हुई थी। क्राइम कंट्रोल करने के लिए अपराधियों में खौफ पैदा करना इनकी प्रायोरिटी थी। इस कारण शोभा अहोटकर का बिहार में दूसरा नाम ‘हंटरवाली’ पड़ा। अपराधी भी इन्हें यही कहते हैं। बीच में 7 साल महाराष्ट्र में काम करने के बाद 5 साल के लिए सेंट्रल डेप्यूटेशन पर रहीं। उस दरम्यान एयर इंडिया में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सिक्योरिटी के पोस्ट पर थीं। अपने कैडर में वापस लौटने के बाद बिहार सरकार ने दिसंबर 2020 में शोभा अहोटकर का प्रमोशन कर डीजी बनाया और अब इन्हें बिहार की डीजीपी बनाए जाने की चर्चा जोरों पर है।
शोभा अहोतकर की निजी जिंदगी पर नजर डालें तो इनके पिता बलराम अहोतकर हैदराबाद में एक्साइज कमिश्नर थे। इस कारण प्राइमरी से लेकर हायर एजुकेशन तक की इनकी पूरी पढ़ाई वहीं हुई। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद से साल 1989 में पॉलिटिकल साइंस से एमए किया। फिर पहले अटेम्प्ट में ही भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की। इनके पिता का भी सपना था कि उनकी बेटी हर हाल में पुलिस सर्विस को ज्वाइन करे, चाहे कैडर कोई भी मिले। शोभा अहोटकर ने अपने पिता से किए वायदे को पूरा कर दिखाया और भारतीय पुलिस सेवा में आने के बाद इन्हें बिहार कैडर मिला। अपने सख्त तेवरों के लिए पहचानी जाने वाली शोभा अहोतकर के बारे में कहा जाता है कि वह जिस भी जिले में एसपी बन कर जाती थीं वहां के अपराधी या तो जेल में होते थे, या फिर जिले से बाहर भाग जाते थे। खुद ही मैदान में उतर कर अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाना इनकी सबसे बड़ी खासियत रही है।


























