एकल उपयोग वाली प्लास्टिक पर प्रतिबंध: बेहतर पृथ्वी की ओर एक बड़ी छलांग

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July 8, 2022

एकल उपयोग वाली प्लास्टिक

लेख| 2018 में जब भारत ने “प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करें” थीम पर विश्व पर्यावरण दिवस की मेजबानी की थी, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एकल उपयोग वाली प्लास्टिक (एसयूपी) को समाप्त करने का आह्वान किया था। एक साल बाद, अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में, पीएम मोदी ने फिर से इस मुद्दे को उठाया और कहा, “क्या हम भारत को एकल उपयोग वाली  प्लास्टिक से मुक्त कर सकते हैं? ऐसे विचार को लागू करने का समय आ गया है। इस दिशा में काम करने के लिए टीमों को तैयार किया जाये…दुकानदारों को जूट और कपड़े के थैले बेचने चाहिए। ग्राहकों को प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के तरीके अपनाने चाहिए। हमें प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करने के लिए प्रौद्योगिकियों का भी उपयोग करना चाहिए।”(एकल उपयोग वाली प्लास्टिक)

 

प्लास्टिक का उपयोग बंद करने के बहुत से उचित कारण मौजूद हैं। प्लास्टिक पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाते हैं। अपशिष्ट-से-ऊर्जा सुविधाओं में केवल प्लास्टिक की एक छोटी मात्रा का पुनर्नवीनीकरण होता है या उन्हें नष्ट किया जाता है। अधिकांश प्लास्टिक को कचरे जमा करने के स्थानों (लैंडफिल) में रखा जाता है, जहां उन्हें विघटित होने में 1,000 से अधिक वर्ष लग सकते हैं। इससे भी खराब स्थिति तब होती है, जब प्लास्टिक जहरीले पदार्थ छोड़ते हैं, जो मिट्टी और पानी में मिल जाते हैं। प्लास्टिक विघटित होने के बाद अत्यधिक छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं, जो अंततः माइक्रोप्लास्टिक बन जाते हैं। नए शोधों से पता चला है कि मिट्टी, पानी और यहां तक कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं, उसमें भी माइक्रोप्लास्टिक मौजूद हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है।

 

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एसयूपी को खत्म करने के भारत के आह्वान को महत्वपूर्ण गति मिली और दुनिया भर में प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई हुई। मार्च में नैरोबी, केन्या में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) पर्यावरण सभा की बैठक में; “प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी बाध्यता की ओर’ को ऐतिहासिक रूप से अपनाया गया। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक, इंगर एंडरसन ने इस सहमति को पेरिस जलवायु समझौते के बाद से सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय पर्यावरण समझौता कहा।(एकल उपयोग वाली प्लास्टिक)

 

भारत में, एसयूपी पर प्रतिबंध 1 जुलाई से शुरू हुआ। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ) ने प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) विषय पर दिशानिर्देश भी अधिसूचित किए हैं। उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों द्वारा ईपीआर के तहत एकत्रित प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे के पुनर्चक्रण के न्यूनतम स्तर को लागू करने के तरीके, प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे से सम्बन्धित चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। ईपीआर दिशानिर्देश नए विकल्पों के विकास को भी बढ़ावा देंगे और स्थायी प्लास्टिक पैकेजिंग को बढ़ावा देंगे।

 

 

दिशानिर्देशों में पैकेजिंग में पुनर्चक्रण से प्राप्त प्लास्टिक सामग्री के उपयोग को भी अनिवार्य किया गया है। यह कदम पुनर्चक्रण से प्राप्त प्लास्टिक सामग्री की मांग पैदा करेगा। विकल्पों को लेकर सवाल किये गए हैं। मोदी सरकार का मानना है कि विकास पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए और पर्यावरण को बचाने के प्रयासों के कारण विकास-कार्य नहीं रुकने चाहिए। इस मूल सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए और पीएम मोदी के पर्यावरण के लिए जीवन शैली (एलआईएफई) के आह्वान के साथ, एमओईएफ ने जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘अन्य विकल्प’ विषय पर एक राष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन किया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को इसी तरह के मेलों का आयोजन करने और एसयूपी विकल्पों का उपयोग शीघ्र शुरू करने के लिए प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया गया है।(एकल उपयोग वाली प्लास्टिक)

 

 

जैविक रूप से विघटित होने वाले प्लास्टिक पर अनंतिम मानक अधिसूचित किये गए हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने विकल्पों का निर्माण करने वाली एमएसएमई इकाइयों का समर्थन करने के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं में विशेष प्रावधान किये हैं। एसयूपी विकल्पों के उपयोग में तेजी लाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहन देने के लिए भी कहा गया है। स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत एमओईएफ, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि विकल्पों पर अभिनव विचारों को आगे बढ़ाया जा सके।

 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने लगभग 200 निर्माताओं को एक बार में प्रमाण पत्र जारी किये हैं, जो कम्पोस्ट में इस्तेमाल होने लायक प्लास्टिक का उत्पादन करते हैं। मोदी सरकार की कारोबार को आसान बनाने की नीति के अनुरूप, प्रमाणपत्रों के नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं है। इन निर्माताओं के प्रमाणीकरण की सुविधा के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है। एमएसएमई उद्यमों का समर्थन करने के लिए, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) के सहयोग से सीपीसीबी कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है; ताकि एमएसएमई, एसयूपी विकल्पों का इस्तेमाल शुरू कर सकें। ई-कॉमर्स कंपनियों, प्रमुख विक्रेताओं/उपयोगकर्ताओं और प्लास्टिक कच्चे माल के निर्माताओं को प्रतिबंध के सम्बन्ध में निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन जनभागीदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण के प्रयास कभी भी वांछित परिणाम प्राप्त नहीं कर सकते। लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाये जा रहे हैं।(एकल उपयोग वाली प्लास्टिक)

 

सीपीसीबी ने एसयूपी प्रतिबंध को सफल बनाने के लिए व्यापक उपाय किए हैं। इसकी व्यापक कार्य योजना में कच्चे माल की आपूर्ति और प्लास्टिक की मांग को कम करने, कुशल निगरानी के लिए डिजिटल प्रणाली शुरू करने व निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य बोर्डों को जागरूक बनाने तथा मार्गदर्शन देने के उपाय शामिल हैं। इस योजना के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए; ‘एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक को समाप्त करना और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन’ पर राष्ट्रीय डैशबोर्ड भी स्थापित किया गया है।

 

यह प्रतिबंध, एक सतत पृथ्वी के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिसके फलस्वरूप हम गर्व से अपनी धरती अगली पीढ़ी को सौंप सकते हैं। लोगों की भागीदारी और संयुक्त प्रयासों के माध्यम से हम अपने दैनिक जीवन से एसयूपी को समाप्त कर सकते हैं। पीएम के एलआईएफई दृष्टिकोण को जीवनचर्या में शामिल करना और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाना ही स्थायी भविष्य के निर्माण के एकमात्र उपाय हैं।

श्री भूपेंद्र यादव पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन तथा श्रम और रोजगार मंत्री हैं। वे ‘द राइज़ ऑफ़ द बीजेपी’ पुस्तक के लेखक हैं।

 

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