पटना| गोदरेज समूह की प्रमुख कंपनी गोदरेज एंड बॉयस ने घोषणा की कि घरेलू और संस्थागत क्षेत्रों में भारत के अग्रणी फर्नीचर समाधान ब्रांड गोदरेज इंटीरियो ने अपने विशेष अध्ययन श् वेलबीइंग एट वर्क इन द बैंकिंग सेक्टरश् के आंकड़ों को जारी किया है। इस अध्ययन से पता चला है कि बैंकों के कर्मचारी स्क्रीन पर लंबा समय बिताते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि बैंकों के कर्मचारी रीयल-टाइम डेटा की निगरानी करने में लंबा समय निकालते हैं और सिस्टम को अपडेट रखते हैं, जो शारीरिक और मानसिक रूप से थकाने वाला है। सर्वेक्षण में पाया गया कि सभी बैंक तंदुरुस्ती या सेहत के महत्व के अनुकूल नहीं हैं और अभी तक एक स्वस्थ कार्य वातावरण को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक संसाधन नहीं हैं। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के बैंकों के लिए काम कर रहे कुल 250 बैंकरों ने इस शोध में भाग लिया। इस सर्वेक्षण ने कर्मचारियों के बीच सही कार्य मुद्राओं, कार्य-डेस्क एर्गाेनॉमिक्स और संपूर्ण तंदुरुस्ती के बारे में जागरूकता की सीमा को समझने का प्रयास किया।(पटना: 64 प्रतिशत बैंक)
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गोदरेज इंटीरियो के वाइस प्रेसिडेंट- मार्केटिंग (बी2बी) समीर जोशी ने कहा, भारत के बैंकिंग क्षेत्र में मजबूत मांग के कारण जबरदस्त वृद्धि देखी जा रही है। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (आईबीईएफ) के अनुमानों के अनुसार, 2025 तक, भारत का फिनटेक बाजार 6.2 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। फिर भी, गोदरेज इंटीरियो के कार्यक्षेत्र और एर्गाेनोमिक रिसर्च सेल द्वारा किए गए अध्ययन से पता चलता है कि, सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के बैंकों को कर्मचारियों की सेहत के लिए अनुकूल वातावरण बनाने पर ध्यान देने की अत्यंत आवश्यकता है। बैंकर अब अपने डेस्क के एक तरफ डिजिटल स्क्रीन के बीच मल्टीटास्किंग में लंबे और अक्सर तनावपूर्ण घंटे बिताते हैं और उन ग्राहकों के साथ टेबल पर बैठते हैं जो सहायता के लिए शारीरिक रूप से शाखा आते हैं। इस शोध अध्ययन का उद्देश्य बैंकों को एमएसडी को दूर रखने के लिए सुनियोजित और एर्गाेनोमिक बुनियादी ढांचे के साथ प्रासंगिक कार्यस्थल को डिजाइन करने में मदद करना है।(पटना: 64 प्रतिशत बैंक)
शोध अध्ययन के अनुसार, अधिकांश बैंकों में एर्गाेनोमिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (श्रमदक्षता शास्त्र अनुकूल संरचना) की कमी है, जो लंबे समय तक बैठने वाले बैंक कर्मचारियों के बीच अस्वास्थ्यकर एर्गाेनोमिक मुद्रा में योगदान देता है। बैंकों में 49 प्रतिशत कुर्सियों में आर्मरेस्ट एडजस्टमेंट की कमी है और 41 प्रतिशत में अभी भी बैक रेक्लाइनर का अभाव है। 26 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियेां के वर्ग में दर्द से पीड़ित लोगों का प्रतिशत काफी अधिक है, और इस संख्या में लगातार वृद्धि जारी है। इससे पता चलता है कि उम्र मस्कुलोस्केलेटल डिस्ऑर्डर (एमएसडी) में एक महत्वपूर्ण कारक हो सकती है।


























