बिहार की राजनीति में इन दिनों गठबंधन की रणनीति और ‘गिव एंड टेक’ की चर्चा जोरों पर है। एनडीए के भीतर यह अटकलें तेज हो गई हैं कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar के संभावित रूप से राज्यसभा जाने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कौन सी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस बीच भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Sinha का बयान भी सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने कहा कि Atal Bihari Vajpayee को सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बने।
करीब दो दशकों से राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे नीतीश कुमार के अगले कदम को लेकर कई संभावनाएं जताई जा रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें केंद्र की राजनीति में बड़ी भूमिका दी जा सकती है। इनमें सबसे प्रमुख अटकल उपप्रधानमंत्री पद को लेकर है, हालांकि 2004 के बाद से देश में यह पद खाली है और आखिरी बार Lal Krishna Advani इस पद पर रहे थे।
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इसके अलावा यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार को एनडीए का संयोजक बनाया जा सकता है, जैसा कि वाजपेयी सरकार के समय George Fernandes को यह जिम्मेदारी दी गई थी। माना जा रहा है कि गठबंधन की राजनीति में नीतीश का अनुभव इस भूमिका में उपयोगी साबित हो सकता है।
एक अन्य संभावना राज्यसभा में सभापति पद की भी जताई जा रही है। हाल ही में इस पद पर बदलाव के बाद नई नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय भी दिया जा सकता है, क्योंकि वे पहले रेल और कृषि जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं।
हालांकि इन सभी अटकलों के बीच अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व के हाथ में माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नीतीश कुमार की भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में किस रूप में तय होती है। फिलहाल बिहार से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज बनी हुई है।

























