असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने सत्ताधारी भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा दो दिवसीय दौरे पर गुरुवार को गुवाहाटी पहुंचीं और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ 20 बिंदुओं वाला ‘जनता आरोप-पत्र’ जारी किया।
कांग्रेस द्वारा जारी इस दस्तावेज में राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप-पत्र में कहा गया है कि वर्तमान सरकार में भ्रष्टाचार संस्थागत रूप ले चुका है और शासन व्यवस्था के भीतर एक समानांतर आर्थिक तंत्र विकसित हो गया है। पार्टी ने अवैध खनन, म्यांमार से अवैध सुपारी तस्करी और नशीले पदार्थों के कारोबार को संरक्षण मिलने के आरोप भी लगाए।
कांग्रेस का दावा है कि सरकार के शीर्ष स्तर पर बैठे लोगों और उनके करीबी रिश्तेदारों ने अवैध तरीके से बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की है। इसके अलावा राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप-पत्र में कोच राजबोंगशी, ताई अहोम, मोरान, मोटोक, चुटिया और आदिवासी चाय जनजातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के वादे पूरे न होने को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।
मानवाधिकार के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार पर “बुलडोजर नीति” अपनाने और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई करने का आरोप लगाया। पुलिस मुठभेड़ों और एहतियाती गिरफ्तारियों की बढ़ती संख्या को भी चिंता का विषय बताया गया।
प्रियंका गांधी, जो असम कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष भी हैं, अपने दौरे के दौरान जिला अध्यक्षों, विधायकों और संभावित उम्मीदवारों के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगी। उनके साथ कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल भी मौजूद हैं।
कांग्रेस का कहना है कि यह आरोप-पत्र राज्यभर में व्यापक जनसंपर्क और विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। चुनावी माहौल में इसे कांग्रेस की ओर से बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

























