पटना। बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया है। पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में होने के कारण इस बार मतदान होना तय माना जा रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा पांचवीं सीट को लेकर हो रही है, जहां महागठबंधन और एनडीए के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वह राज्य के संपन्न नेताओं में गिने जाते हैं और पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। राजद नेतृत्व को उम्मीद है कि जातीय समीकरण और अतिरिक्त समर्थन के सहारे इस सीट पर जीत हासिल की जा सकती है।

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राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस मुकाबले में भूमिहार वोट बैंक अहम भूमिका निभा सकता है। बताया जा रहा है कि राजद की नजर एनडीए के कुछ भूमिहार विधायकों पर है। यदि इनमें से कुछ विधायक महागठबंधन के पक्ष में आते हैं तो चुनाव का समीकरण बदल सकता है। इसी संभावना को देखते हुए एनडीए खेमे में भी हलचल बढ़ गई है।
इधर महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव ने अपने सहयोगी दलों के विधायकों के साथ बैठक बुलाई है। इसमें विधायकों को मतदान की प्रक्रिया और रणनीति के बारे में जानकारी दी जा रही है। माना जा रहा है कि अगर एआईएमआईएम और बसपा के विधायक समर्थन देते हैं तो राजद उम्मीदवार की जीत की राह आसान हो सकती है।
दूसरी ओर एनडीए भी पूरी ताकत से पांचों सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। गठबंधन के नेता लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट की संभावना को रोका जा सके।
दरअसल, राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। ऐसे में पांचवीं सीट का गणित बेहद दिलचस्प हो गया है। यही वजह है कि दोनों खेमे अपने-अपने दावे कर रहे हैं और अंतिम नतीजे तक सस्पेंस बरकरार रहने की संभावना है।

























