मार्च 2026 के मध्य में वैश्विक राजनीति बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है। दुनिया के तीन बड़े क्षेत्रों में बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विश्लेषकों का मानना है कि पूर्वी यूरोप, मध्य पूर्व और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और यदि स्थिति और बिगड़ी तो वैश्विक युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है।(तीसरे विश्व युद्ध)
पूर्वी यूरोप में Russia–Ukraine War अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। रूस ने हाल के महीनों में मिसाइल हमलों की गति बढ़ा दी है, जबकि यूक्रेन को नाटो देशों से लगातार सैन्य सहायता मिल रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का ध्यान फिलहाल मध्य पूर्व की ओर ज्यादा केंद्रित होने से यूक्रेन को मिलने वाली मदद पर असर पड़ सकता है। ऐसे में यदि रूस और नाटो के बीच सीधा टकराव होता है, तो संघर्ष का दायरा तेजी से बढ़ सकता है।
90 डॉलर से नीचे फिसली कच्चे तेल की कीमत, जानिए गिरावट के पीछे की तीन बड़ी वजहें
दूसरी ओर मध्य पूर्व में Strait of Hormuz को लेकर तनाव गहरा गया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर हमले के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
तीसरा बड़ा तनाव South China Sea में देखा जा रहा है, जहां चीन की हजारों नौकाओं की असामान्य गतिविधियां दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नौकाएं चीन की समुद्री मिलिशिया का हिस्सा हो सकती हैं। इस स्थिति ने जापान, वियतनाम, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस जैसे देशों की चिंता बढ़ा दी है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि इन तीनों क्षेत्रों में किसी भी स्तर पर सैन्य टकराव बढ़ता है या बड़ी शक्ति सीधे आमने-सामने आती है, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़कर वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है। फिलहाल दुनिया बेहद नाजुक संतुलन पर खड़ी दिखाई दे रही है।

























