पटना/नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़े कानूनी झटके के साथ हुई है। बहुचर्चित नौकरी के बदले जमीन घोटाले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती समेत कई आरोपियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया है। यह फैसला सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर सुनाया गया है।
मामला वर्ष 2009 का है, जब यूपीए सरकार के दौरान लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में नौकरी देने के बदले उम्मीदवारों से जमीन उनके परिवार के सदस्यों या करीबी लोगों के नाम लिखवाई गई। सीबीआई ने इसे गंभीर भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का मामला बताया है।
राउज एवेन्यू कोर्ट में सीबीआई के विशेष जज विशाल गोगने ने इस केस में फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान मीसा भारती और तेज प्रताप यादव सहित कई आरोपी कोर्ट में मौजूद रहे, जबकि लालू प्रसाद यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। कोर्ट ने कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं, हालांकि इस दौरान पांच आरोपियों की मौत हो चुकी है। वहीं, कोर्ट ने 52 आरोपियों को इस मामले में बरी भी कर दिया है।
कोर्ट के आदेश में कहा गया कि यह मामला सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सत्ता के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश से जुड़ा है। अब इस केस में नियमित ट्रायल चलेगा, जिसकी अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की गई है।
इस फैसले के बाद लालू यादव परिवार की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अगर आरोप साबित होते हैं तो इसका असर राजद की राजनीति और खासकर तेजस्वी यादव के भविष्य पर भी पड़ सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसे बिहार की राजनीति के लिए एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
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